अ जब सी ऊब शामिल हो गयी है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर ...
चेहरे पर चँचल लट उलझी....
चेहरे पर चँचल लट उलझी, आँखों मे सपन सुहाने हैं ये वही पुरानी राहें हैं, ये दिन भी वही पुराने हैं कुछ तुम भूली कुछ मै भूला मंज़िल फिर से...
मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक गया
मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक गया रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा ज़िन्दगी क...
मै कवि हूँ.....
सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी हर विवश आँख के आँसू को यूँ ही हँस हँस पीना होगा ...
आना तुम मेरे घर... अधरों पर हास लिये
आना तुम मेरे घर अधरों पर हास लिये तन-मन की धरती पर झर-झर-झर-झर-झरना साँसों मे प्रश्नों का आकुल आकाश लिये तुमको पथ में कुछ मर्यादाएँ रोकेंगी ...
डॉ. कुमार विश्वास के कुछ मुक्तक
अभी चलना है रस्ते को मैं मंजिल मान लुं कैसे? मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मान लुं कैसे? तुम्हारी याद के आदिम अंधेरे मुझको घेरे है, तुम्हा...
तुम अगर नहीं आयीं
तुम अगर नहीं आयीं ... गीत गा ना पाऊँगा . साँस साथ छोडेगी सुर सजा ना पाऊँगा .. तान भावना की है .. शब्द शब्द दर्पण है .. बाँ...
कुछ छोटे सपनो के बदले
कुछ छोटे सपनो के बदले , बड़ी नींद का सौदा करने , निकल पडे हैं पांव अभागे , जाने कौन डगर ठहरेंगे ! वही प्यास के अनगढ़ मोत...
अमावस की काली रातों में
अमावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है, जब दर्द की प्याली रातों में गम आंसू के संग होते हैं, जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले ह...
प्यार नहीं दे पाऊँगा
ओ कल्प -वृक्ष की सोन -जूही ओ अमल -ताश की अमर कली धरती के आताप से जलते मन पर छाई निर्मल बदली मैं तुमको मधु -शहद -गंध युक्त,संसार नही दे पाउँग...
कोई दीवाना कहता है
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है, मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है ये मेरा दिल समझता ह...









